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भ्रष्टाचार या डिजिटल डकैती? HPSEBL के ‘तानाशाही’ स्मार्ट मीटरों के खिलाफ शिमला के स्थानीय निवासी ने खोला मोर्चा!

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भ्रष्टाचार या डिजिटल डकैती? HPSEBL के ‘तानाशाही’ स्मार्ट मीटरों के खिलाफ शिमला के स्थानीय निवासी ने खोला मोर्चा!

 

 

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) की कार्यप्रणाली और स्मार्ट मीटरों के नाम पर जनता को डराने-धमकानी वाली नीतियों के खिलाफ एक बड़ा संवैधानिक विस्फोट हुआ है। शिमला के एक जागरूक नागरिक, अतुल शर्मा, ने बिजली बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना को एक कड़ा पत्र लिखकर बोर्ड की ‘दबंगई’ और ‘ब्यूरोक्रेटिक अहंकार’ की धज्जियाँ उड़ा दी हैं।
प्रमुख आरोप: बिजली बोर्ड या ‘जज-ज्यूरी-जल्लाद’? पत्र में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि HPSEBL उपभोक्ताओं को नागरिक नहीं, बल्कि गुलाम समझ रहा है। स्मार्ट मीटरों के कारण आ रहे भारी-भरकम बिलों की शिकायतों को जांच के बिना ही “गलत” करार देना बोर्ड की तानाशाही को दर्शाता है।
* संवैधानिक खतरे की घंटी: नागरिक का कहना है कि बिजली बोर्ड का प्रेस नोट प्रशासन नहीं, बल्कि संवैधानिक आतंक है। बोर्ड खुद ही जज और जल्लाद बनकर जनता की शिकायतों को कुचल रहा है।
* डाटा की चोरी का शक? स्मार्ट मीटरों को ‘स्मार्ट सर्विलांस’ (जासूसी) करार देते हुए सवाल उठाया गया है कि क्या बिजली बोर्ड जनता का व्यक्तिगत डाटा ‘हार्वेस्ट’ कर रहा है? प्राइवेसी के मौलिक अधिकार का सरेआम उल्लंघन हो रहा है।
पुलिस का डर दिखाकर डकैती? पत्र में खुलासा किया गया है कि बोर्ड सरकारी काम में बाधा डालने की धमकी (भारतीय न्याय संहिता की धारा 221) देकर जनता को डरा रहा है। शर्मा ने साफ कहा कि अपने घर में शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं, बल्कि अधिकार है।
* उपभोक्ता कानून की धज्जियाँ: “उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019” को रद्दी का टुकड़ा समझने का आरोप लगाते हुए पूछा गया है कि स्वतंत्र ऑडिट और डाटा सुरक्षा प्रोटोकॉल कहाँ हैं?
सीधी चेतावनी: “सुधर जाओ, वरना कोर्ट घसीटेंगे!” कैप्टन अतुल शर्मा ने चेयरमैन को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है:

* तुरंत डराने-धमकाने वाला प्रेस नोट वापस लें।
* स्मार्ट मीटरों की जबरन इंस्टॉलेशन रोकी जाए।
* स्वतंत्र विशेषज्ञों और जनता के प्रतिनिधियों की कमेटी बनाई जाए।

पत्र के अंत में स्पष्ट किया गया है कि यदि बोर्ड ने अपनी ‘अंधेरगर्दी’ बंद नहीं की, तो मामला हाईकोर्ट और कंज्यूमर कोर्ट तक जाएगा।

> “लोकतंत्र में बिजली बोर्ड सेवा करने के लिए होते हैं, जनता को डराने के लिए नहीं। अगर बोर्ड डराने पर उतर आया है, तो यह उसकी ताकत नहीं, बल्कि उसकी घबराहट का प्रतीक है।” –
कैप्टन अतुल शर्मा

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