समय पर मिलती मदद तो बच सकती थी जान, 2 घंटों तक गाड़ी के अंदर ही फंसा रहा ज्ञान रमचाईक।
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समय पर मिलती मदद तो बच सकती थी जान, 2 घंटों तक गाड़ी के अंदर ही फंसा रहा ज्ञान रमचाईक।
सुरेश रंजन
न्यूज़ टुडे हिमाचल 3 नवंबर नेरवा: उपमंडल चौपाल के तहत देईया से 3 किलोमीटर दूर घडाच के पास दो नवमबर को हुई बोलेरो कैंपर दुर्घटना में एक व्यक्ति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई तथा गाड़ी में सवार एक अन्य व्यक्ति ज्ञान नामक जो कि दुर्घटना के बाद भी 2 घंटे तक गाड़ी के बीच फसा रहा तथा अपनी जान की भीख मांग रहा था और बचाओ बचाओ चिल्ला रहा था। परन्तु समय पर उसे सहायता मिलती तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। दुर्घटना की सूचनाजैसे ही पुलिस थाना नेरवा को मिली तो पुलिस थाना नेरवा के जवानों को
घटनास्थल पर भेजा गया लेकिन घायल व्यक्ति तब भी
गाड़ी के अंदर चीख रहा था। 

जिस स्थान पर गाड़ी गिरी है वहां बहुत ही संकरी ढलान है जिसमे उतरने को कोई भी तैयार नही था। गाड़ी तक पहुंचने के लिए लंबी-लंबी रस्सियों की आवश्यकता थी लेकिन प्रशासन व पुलिस के पास इसका कोई पुख्ता इंतजाम नहीं
था,जिस कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी देरी हो गई।
प्रधान ग्राम पंचायत नेरवा बेबी भिखटा ने कहा कि हमें जैसे ही घटना की सूचना मिली तो हम घटनास्थल से 60 किलोमीटर दूर से घटनास्थल पर आए लेकिन वहां पर प्रशासन का कोई भी अधिकारी नही था जो कि इनकी सहायता के लिए आगे आते।
यदि इस दुर्घटना में बचाव कार्य समय पर होता तो 3 घण्टों तक जिंदगी और मौत से जूझते शख्स की जान बचाई जा सकती थी।जिसे कि 2 घंटे के बाद घटनास्थल से स्थानीय लोगों द्वारा दुकानों से रस्सी खरीदकर रस्सी से खींच कर निकाला गया उसके बाद भी शकस 1 घंटे तक जिंदा था तथा पूरे 3 घंटे बीत जाने के बाद रेंजट नामक स्थान पर गाड़ी मे अंतिम सांस ली।
इस मौत में पूरा चौपाल गम है लेकिन चौपाल के नेताओं को इन सब से क्या लेना है वह तो बाद में ही घर जाकर दुख व्यक्त कर अपना पल्ला झाड़ कर चले जाते है, कभी उन्होंने अपने मन को टटोल कर देखा कि आए दिन क्ष्रेत्र में सड़क दुर्घटनाओं का क्या कारण है तथा दुर्घटना के बाद राहत व बचाव कार्य मे प्रशासन हमेशा नाकाम रहा है वही क्षेत्र के अस्पतालों के तो कहने ही क्या।
चौपाल नेरवा की जनता में हादसों के बाद प्रशासन के लचर रवैए पर भारी रोष है।
उधर उपमंडल अधिकारी चौपाल अनिल चौहान का कहना है कि जैसे ही दुर्घटना की खबर प्रशासन को मिली वैसे ही प्रशासन द्वारा पुलिस के अधिकारी व रेवेन्यू विभाग से कानूगो तथा पटवारी को दुर्घटना स्थल पर भेजा गया तथा जिन्होंने की स्थानीय लोगों के साथ बचाव कार्य में हाथ बटाया।उपमंडल अधिकारी चौपाल अनिल चौहान का यह भी कहना है कि यदि सूचना में यह कहा जाता है कि गाड़ी ढांक से नीचे गई हुई है जहां के लिए रेस्क्यू की जरूरत पड़ेगी तो हम होमगार्ड व अग्निशमन विभाग के जवान को वहां रेस्क्यू के लिए भेज देते।इस तरह की कोई भी सूचना प्रशासन को नहीं दी गई लेकिन उन्होंने यह कहा कि आज के बाद हर पंचायत में रेस्क्यू का सामान रखा जाएगा तथा जैसे ही कहीं भी दुर्घटना होती है या कोई एक्सीडेंट होता है तो वहां पर रेस्क्यू टीम को तुरंत भेजा जाएगा ताकि इस तरह का कोई और मामला सामने ना आए।
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