स्काउट एवं गाईड तथा ईको क्लब ने मनाया सशस्त्र सेना झंडा दिवस।
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स्काउट एवं गाईड तथा ईको क्लब ने मनाया सशस्त्र सेना झंडा दिवस।
देश की आन बान और शान पर मर मिटने वाले शहीदों तथा पुरुष व महिला रक्षा कर्मियों को इस दिन सम्मानित किया जाता है ।
राज सोनी
न्यूज़ टुडे संवाददाता करसोग,8 दिसंबर: जिला मंडी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रेसी में भारत स्काउटस एवं गाईडस इकाई तथा देवदार ईको क्लब के सदस्यों द्वारा स्काउट मास्टर व प्रभारी देवदार ईको क्लब अंकुश ठाकुर की अगुवाई में सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाया जिसमें प्रधानाचार्य इन्द्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की व रोवर लीडर मोहन सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।सैनिकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हुए इन्द्र सिंह ने सरहद पर दिन रात तैनात रहने वाले शहीदों को याद करते हुए इस दिन सभी सैनिकों व शहीदों के आश्रितों के प्रति सहयोग की भावना व्यक्त की। इस अवसर पर नीतेश, नागेश, खेम सिंह,अमर चंद, चेतन, संजय, भूपेंद्र, अंजली, निशा ने पेंटिंग बनाईं व स्लोगन लिखे इस मौके पर चमन लाल, सेत राम, उमेश तथा अन्य भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम के आरम्भ में ईको क्लब की सदस्या कौशल्या देवी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए 7 दिसंबर 1949 को झंडा दिवस के रूप में मनाया गया व इस दिन सशस्त्र सेना झंडा के टिकटों के माध्यम से धन एकत्रित कर जरूरत मंद सैनिकों, दिव्यांग सैनिकों व शहीदों के आश्रितों तक इसे पहुंचाया जाता है, शीतल देवी ने बताया कि 1949 से आरंभ इस दिवस को 1993 से लेकर सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है व अपने देश अपनी सेना के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक बेहतरीन दिन है जिसके चलते कुछ अंशदान कर उन शहीदों व सैनिकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। शालू कुमारी ने देश भक्ति की कविता से सभी को भावविभोर कर दिया एक ओर जहां नेहा व सखियों के ‘दिल दिया है जां भी देंगे’ से देश के प्रति प्रेम को उजागर किया वहीं रोवरस व ईको क्लब के सदस्यों राजकुमार युगल किशोर, गोपाल मनीष, टिक्कम, के देशभक्ति के गीत से रोम रोम आनंदित हो गया। अंकुश ठाकुर ने इस अवसर पर सभी से इस दिवस पर सैनिकों के बलिदान और उनके लिए सहयोग का हाथ हमेशा बढ़ाते रहने का आह्वान किया क्योंकि हम सभी की रक्षा व सुरक्षा के लिए सैनिक सरहद पे शहीद हो जाते हैं ऐसे में उनके आश्रितों के साथ इस संकट की घड़ी में खड़े होना हमारा परम कर्तव्य है। वहीं मोहन सिंह ने विद्यार्थियों को भी इस प्रकार का सम्मान वतन की रक्षा करने वालों के प्रति रखने का आह्वान किया।
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