गिरी सेंज डैम की 88.75 करोड़ की राशि शिफ्ट करने का मामला फिर गरमाया। पूर्व भाजपा सरकार पर डैम की स्वीकृत राशि मंडी, धर्मपुर और एम्स बिलासपुर की ओर शिफ्ट करने का आरोप।
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गिरी सेंज डैम की 88.75 करोड़ की राशि शिफ्ट करने का मामला फिर गरमाया।
पूर्व भाजपा सरकार पर डैम की स्वीकृत राशि मंडी, धर्मपुर और एम्स बिलासपुर की ओर शिफ्ट करने का आरोप।
इंजीनियर एम. आर. बरागटा ने मुख्यमंत्री से परियोजना को पुनः प्राथमिकता देने की मांग की
शिमला। हिमाचल प्रदेश INTUC Federation के संयोजक एवं प्रवक्ता इंजीनियर एम. आर. बरागटा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र भेजकर जिला शिमला के ठियोग क्षेत्र से संबंधित गिरी सेंज डैम परियोजना का मामला उठाया है। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में परियोजना के लिए स्वीकृत राशि को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
इंजीनियर एम. आर. बरागटा ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि पूर्व जयराम सरकार के कार्यकाल में गिरी सेंज डैम के लिए स्वीकृत करीब 88.75 करोड़ रुपये की राशि को मंडी, धर्मपुर तथा एम्स बिलासपुर की ओर शिफ्ट कर दिया गया था। उनके अनुसार, राशि के स्थानांतरण के कारण गिरी सेंज डैम का निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका।
बरागटा ने कहा कि गिरी सेंज डैम क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना थी। इसके निर्माण से जिला शिमला व चौपाल विधानसभा क्षेत्र की करीब छह पंचायतों को पेयजल एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के साथ-साथ शिमला शहर को लगभग 10 एमएलडी पेयजल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य था। ऐसे में परियोजना के लिए स्वीकृत राशि को अन्यत्र शिफ्ट किए जाने से क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों को झटका लगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले को समय-समय पर ठियोग, शिमला और चौपाल के विधायकों के समक्ष भी उठाया गया है। इसके अलावा मामला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष भी उठाए जाने की बात उन्होंने कही।
इंजीनियर बरागटा ने कहा कि गिरी सेंज डैम के लिए पूर्व में डीपीआर तैयार की गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि संबंधित विभाग से पूरे मामले की जानकारी लेकर यह देखा जाए कि परियोजना को किस प्रकार पुनः आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि पूर्व निर्धारित स्थल पर निर्माण संभव नहीं है, तो विशेषज्ञों की राय के आधार पर किसी उपयुक्त वैकल्पिक स्थल पर परियोजना को विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि गिरी सेंज डैम परियोजना को क्षेत्र की पेयजल एवं सिंचाई जरूरतों को देखते हुए प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए और परियोजना के लिए आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी प्रक्रिया शुरू की जाए।
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