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नए जिलों के गठन पर सुधीर शर्मा का सरकार पर हमला, बोले— ‘घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने’

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नए जिलों के गठन पर सुधीर शर्मा का सरकार पर हमला, बोले— ‘घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने’

भाजपा विधायक ने उठाए सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल, कहा— नए जिलों के बजाय मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और बुनियादी सुविधाएं सुधारने पर दे ध्यान

न्यूज टुडे हिमाचल ब्यूरो | शिमला

हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रदेश में नए जिलों के गठन के लिए आयोग बनाए जाने की चर्चाओं के बीच धर्मशाला से भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नए जिलों के गठन की कवायद को जनता का ध्यान भटकाने वाला मुद्दा करार देते हुए सरकार की आर्थिक स्थिति और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। सुधीर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “घर में नहीं दाने, अम्मा चली भुनाने।” उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में सड़कों के गड्ढे भरने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त संसाधनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो ऐसे में नए जिलों के गठन पर विचार करना कितना उचित है?

नए जिले नहीं, स्मार्ट वर्किंग की जरूरत

शिमला विश्वविद्यालय में हमीरपुर छात्र एसोसिएशन के कार्यक्रम ‘हमीर संगम’ में पहुंचे सुधीर शर्मा ने कहा कि मौजूदा दौर में प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नए जिलों का गठन ही एकमात्र विकल्प नहीं है। सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करते हुए स्मार्ट वर्किंग को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि आम लोगों को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल जिलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए। यदि मौजूदा व्यवस्था में ही सरकारी फाइलों के निपटारे में देरी हो रही है, तो सरकार को पहले इन कमियों को दूर करना चाहिए।

नए जिलों से कई सौ करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका

सुधीर शर्मा ने नए जिलों के गठन की संभावित लागत को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने पर प्रदेश को कई सौ करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। उनके अनुसार, नए जिलों के लिए प्रशासनिक ढांचे का विस्तार करने, कार्यालय स्थापित करने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए बड़ी धनराशि की आवश्यकता होगी।

भाजपा विधायक ने सवाल किया कि जब हिमाचल प्रदेश पहले से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो इस अतिरिक्त खर्च के लिए धन कहां से आएगा? उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े प्रशासनिक फैसले से पहले उसकी लागत, वित्तीय संसाधनों और प्रदेश की विकास योजनाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए।

‘सड़कों के गड्ढे भरने के पैसे नहीं, नए जिले बनाने की बात’

सुधीर शर्मा ने प्रदेश की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को नए जिलों के गठन से पहले सड़कों की मरम्मत, विकास कार्यों और आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बेहतर सड़कें, समयबद्ध सरकारी सेवाएं और प्रभावी प्रशासन जनता की प्राथमिक जरूरतें हैं। ऐसे में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि नए जिलों के गठन से प्रदेश को क्या ठोस लाभ मिलेगा और इस पर होने वाला खर्च अन्य विकास कार्यों को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

‘छह महीने तक नए जिलों की चर्चा में उलझी रहेगी जनता’

भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि नए जिलों के गठन की चर्चा के जरिए जनता का ध्यान प्रदेश के दूसरे ज्वलंत मुद्दों से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब लोग इस बहस में उलझे रहेंगे कि कौन-सा नया जिला बनेगा, उनका क्षेत्र किस जिले में शामिल होगा और जिला मुख्यालय कहां बनाया जाएगा।

सुधीर शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि इस चर्चा में जनता के अगले छह महीने निकल सकते हैं, जबकि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियां, विकास कार्यों से जुड़ी समस्याएं और आम लोगों की परेशानियां जस की तस बनी रहेंगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या नए जिलों की चर्चा से जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान हो जाएगा?

दस गारंटियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी घेरा

सुधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार की चुनावी दस गारंटियों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को अपने चुनावी वादों और प्रदेश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं और सीमित वित्तीय संसाधनों का उपयोग किन क्षेत्रों में किया जा रहा है।

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और आईएएस अधिकारियों की उपलब्धता तथा कामकाज की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कई बार फाइलें एक अधिकारी से दूसरे और फिर तीसरे अधिकारी के पास जाती रहती हैं, जिससे निर्णय लेने में देरी होती है। ऐसे में नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने से पहले मौजूदा व्यवस्था को अधिक सरल, जवाबदेह और प्रभावी बनाना जरूरी है।

स्थानीय संस्कृति और जरूरतों को ध्यान में रखने की बात

सुधीर शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जिलों का गठन करते समय स्थानीय संस्कृति, भाषा और क्षेत्रीय परिस्थितियों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए जिलों के गठन जैसा महत्वपूर्ण निर्णय केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके पीछे स्पष्ट प्रशासनिक जरूरत और जनता को मिलने वाले लाभ का आकलन होना चाहिए।

सुधीर शर्मा ने सरकार से मांग की कि नए जिलों के गठन पर आगे बढ़ने से पहले उसकी आर्थिक लागत, प्रशासनिक जरूरत और जनहित से जुड़े पहलुओं को स्पष्ट किया जाए। उनके बयान के बाद प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।

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