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MIS भुगतान से लेकर CA स्टोर तक सरकार पर बरसे संदीपनी भारद्वाज बोले—बागवानी क्षेत्र की व्यवस्थाएं चरमराईं, सरकार बागवानों के सामने रखे वास्तविक आंकड़े

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MIS भुगतान से लेकर CA स्टोर तक सरकार पर बरसे संदीपनी भारद्वाज

बोले—बागवानी क्षेत्र की व्यवस्थाएं चरमराईं, सरकार बागवानों के सामने रखे वास्तविक आंकड़े

शिमला। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल प्रदेश में बागवानी क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सेब बागवानों के सामने MIS भुगतान, सेब खरीद, भंडारण और विपणन से जुड़ी कई समस्याएं हैं और सरकार को केवल घोषणाओं के बजाय इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक Market Intervention Scheme (MIS) के तहत करीब 10 हजार मीट्रिक टन C-ग्रेड सेब की खरीद हुई है, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा करीब 98,540 मीट्रिक टन रहा था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस साल की MIS खरीद पिछले करीब एक दशक के सबसे निचले स्तर पर रहने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि इस गिरावट के पीछे कम सेब उत्पादन और खुले बाजार में अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। पिछले वर्ष करीब 3.5 करोड़ सेब पेटियों का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष उत्पादन दो करोड़ पेटियों के शुरुआती अनुमान तक भी नहीं पहुंचने की संभावना जताई गई है। साथ ही MIS में इस वर्ष करीब 18 हजार बागवानों ने पंजीकरण कराया है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या लगभग 45 हजार थी।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि पंजीकरण और MIS खरीद में आई इस गिरावट में कम उत्पादन, खुले बाजार की कीमतों और नई ऑनलाइन व्यवस्था का कितना-कितना प्रभाव रहा है। इस वर्ष MIS प्रक्रिया को HPMIS पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किया गया है, जिसमें पंजीकरण, खरीद, डिजिटल रसीद, परिवहन, प्रसंस्करण, निगरानी और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

पुराने MIS भुगतान पर सरकार दे स्पष्ट जवाब

संदीपनी भारद्वाज ने पुराने MIS भुगतान को लेकर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बकाया भुगतान के लिए राशि जारी करने की घोषणाएं की गई हैं, लेकिन इसके बावजूद कई बागवानों को भुगतान मिलने में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए कि पिछले वर्ष के MIS का कुल कितना भुगतान लंबित है, कितने बागवानों को भुगतान किया जा चुका है और कितने मामले दस्तावेज या जांच के कारण लंबित हैं।

उन्होंने कहा, “बागवान को घोषणा नहीं, उसके खाते में समय पर पैसा चाहिए।”

भारद्वाज ने कहा कि पिछली MIS खरीद से जुड़े रिकॉर्ड में अनियमितताओं की जांच की खबरें भी सामने आई हैं। यदि कहीं अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच की प्रक्रिया के कारण वास्तविक बागवानों का वैध भुगतान अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहना चाहिए।

CA स्टोर की क्षमता नहीं, वास्तविक उपयोग का आंकड़ा बताए सरकार

भाजपा प्रवक्ता ने CA स्टोरेज को लेकर भी सरकार से विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा CA स्टोर्स की क्षमता और किसानों के लिए आरक्षित क्षमता की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इस सीजन में वास्तव में कितने बागवानों ने सरकारी CA स्टोर्स का इस्तेमाल किया, कितनी मात्रा में सेब स्टोर हुआ, किसानों को किस दर पर सुविधा मिली और स्टोर किए गए सेब की बाद में किस औसत कीमत पर बिक्री हुई।

भारद्वाज ने कहा कि इन आंकड़ों से ही यह पता चल सकेगा कि CA स्टोरेज की व्यवस्था का वास्तविक लाभ बागवानों तक कितना पहुंचा।

सेब हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि सेब हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बागवानी क्षेत्र का महत्वपूर्ण आधार है। उपलब्ध सरकारी विवरण के अनुसार सेब प्रदेश के कुल फल उत्पादन में करीब 80 प्रतिशत योगदान देता है और फलदार फसलों के कुल क्षेत्रफल में इसका हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत है। शिमला जिला राज्य के सेब उत्पादन में करीब 55 प्रतिशत योगदान देता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे में सरकार को बागवानों से जुड़े आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि MIS के लंबित भुगतान, वर्षवार सेब खरीद, पंजीकृत बागवानों की संख्या, CA स्टोरेज की वास्तविक उपयोग क्षमता और बागवानों को मिले लाभ को लेकर विस्तृत स्थिति पत्र जारी किया जाए।

भारद्वाज ने कहा कि बागवानों के हितों की असली कसौटी घोषणाएं नहीं, बल्कि यह है कि उन्हें फसल का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, सुरक्षित भंडारण और पारदर्शी विपणन व्यवस्था मिल रही है या नहीं।

न्यूज टुडे हिमाचल ब्यूरो, शिमला

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